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हाथियों का आतंक
धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में जंगली हाथियों के झुंड ने एक सहायक शिक्षक को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हाथियों का झुंड मक्का की फसल खाने के लिए गांव के आसपास पहुंचा था। इसी दौरान सहायक शिक्षक हाथियों की चपेट में आ गए। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। देर रात जंगली हाथियों का झुंड खेतों की ओर आया था। हाथियों ने मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली तो कई लोग हाथियों को भगाने के लिए मौके पर पहुंचे। इसी दौरान सहायक शिक्षक भी वहां पहुंच गए और अचानक झुंड के एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया।
हाथी ने कुचलकर मार डाला
हाथी के हमले से शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें हाथियों के झुंड से दूर निकाला, लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। बाद में उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में मातम पसर गया। शिक्षक की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में जंगली हाथियों की आवाजाही लंबे समय से बनी हुई है और कई बार फसलों को नुकसान पहुंचा चुके हैं।
गांव में दहशत का माहौल
घटना के बाद आसपास के गांवों में भी डर का माहौल बन गया है। ग्रामीण रात के समय घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। खेतों में तैयार मक्का की फसल जंगली हाथियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से हाथियों के झुंड को आबादी से दूर जंगल की ओर भेजने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं से जान-माल का खतरा बढ़ता जा रहा है।
वन विभाग की टीम सक्रिय
घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया। टीम ग्रामीणों को हाथियों से दूरी बनाए रखने और रात के समय सतर्क रहने की सलाह दे रही है। वन विभाग की ओर से झुंड की लोकेशन पर नजर रखी जा रही है, ताकि हाथियों को सुरक्षित तरीके से आबादी वाले क्षेत्र से दूर किया जा सके।
फसल को भी हुआ नुकसान
हाथियों के झुंड ने खेतों में खड़ी मक्का की फसल को भी नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रभावित परिवार को मुआवजा देने और फसल नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। इस घटना के बाद धनबाद के ग्रामीण इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष का मुद्दा एक बार फिर गंभीर हो गया है।
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